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Breaking :उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, सरकार से मांगा जवाब

By damuwadhungalive

Published on:

तारीख: 23 जून 2025

उत्तराखंड के नैनीताल उच्च न्यायालय ने राज्य में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी है। अदालत ने यह आदेश आरक्षण रोटेशन प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों की सुनवाई के दौरान दिया और सरकार से spreservation रोटेशन के नए आदेशों पर स्पष्टीकरण मांगा है ।

⚖️ विवाद की मुख्य बातें

याचिका, बागेश्वर निवासी गणेश दत्त कांडपाल और अन्य द्वारा दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि:

9 जून 2025 को जारी नियमावली में संशोधन करके पुरानी आरक्षण रोटेशन को रद्द कर नया रोटेशन लागू किया गया।

इससे कुछ सीटों पर पिछले तीन कार्यकाल से लगातार आरक्षण लगाया गया—जिससे याचिकाकर्ता चुनाव में भाग ना ले सके ।

अदालत की खंडपीठ (मुख्य न्यायाधीश G. नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा) ने:

फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह रोक दी।

सरकार को तीन दिनों में स्पष्ट जबाव देने का निर्देश दिया ।

🗓️ चुनाव कार्यक्रम पर इसका प्रभाव

राज्य में चुनाव आयोग की ओर से चुनाव दो चरणों में प्रस्तावित थे:

10 और 15 जुलाई को मतदान,

19 जुलाई को मतगणना,

नामांकन की तारीखें: 25–28 जून,

प्रतीकों का आवंटन: जुलाई की पहली हफ्ता ।

लेकिन अब, रोटेशन से जुड़ी कानूनी जटिलताओं के कारण ये कार्यक्रम अगली सुनवाई तक रुक गए हैं।

🚸 ग्रामीण प्रशासन पर यह असर

पंचायतें ग्रामीण विकास की गर्दन होती हैं — शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, जल आपूर्ति जैसी योजनाओं का संचालन इन्हीं संस्थाओं के जरिये होता है। इस रोक से ग्रामीण प्रशासन पर प्रभाव पड रहा है और कार्य स्थगन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है ।


👉 अब आगे क्या होगा?

  1. सरकार को तीन दिन में अदालत में रोटेशन प्रक्रिया स्पष्ट करनी होगी।
  2. अगली सुनवाई में जवाब मिलने के बाद ही:

अदालत चुनाव स्थगन को बढ़ा या फिर रद्द कर सकती है,

या फिर चुनाव कार्यक्रम में नए रोटेशन के आलोक में संशोधन ला सकती है।

राज्य के हजारों ग्रामीणों और कम्युनिटीज़ के लिए यह मुद्दा स्थानीय प्रशासन और विकास के लिहाज से बेहद अहम है।


🔍 निष्कर्ष

याचिका ने रोटेशन प्रक्रिया पर सवाल उठाए,

हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई और जवाब मांगा,

जबकि राज्य और चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की तैयारी में लगे हुए थे।

यह मामला अब अदालत की अगली सुनवाई तक विराम की स्थिति में रहेगा और चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकता है।

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