देहरादून। उत्तराखंड शिक्षा विभाग में इस वर्ष का तबादला सत्र फिलहाल स्थगित है, लेकिन अब सरकार इसे पुनः शुरू कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने रविवार को बताया कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने हाईकोर्ट में काउंटर दाखिल करने की अनुमति दे दी है। इसके बाद सरकार की ओर से न्यायालय में पक्ष रखने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग की “सुगम-दुर्गम” नीति और स्थानांतरण प्रक्रिया की वैधता को लेकर सवाल उठाए थे। न्यायालय ने राज्य सरकार से तबादला सत्र को शून्य घोषित करने का कारण भी स्पष्ट करने को कहा था। इसी वजह से शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया था।
डॉ. सती ने बताया कि राज्य के विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए तीन स्तर की व्यवस्थाएं होती हैं—जिला कैडर, मंडल कैडर और राज्य स्तर का कैडर। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक आमतौर पर जिला कैडर में आते हैं, जबकि एलटी (सहायक अध्यापक) के शिक्षक मंडल स्तर पर आते हैं। प्रवक्ता वर्ग के शिक्षक राज्य स्तर के कैडर का हिस्सा होते हैं।
हाईकोर्ट द्वारा तबादला नीति पर आपत्ति जताए जाने के बाद, वर्तमान में इन सभी श्रेणियों के शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया रोक दी गई है। सरकार का कहना है कि तबादला सत्र को शून्य घोषित करना अस्थायी निर्णय था, ताकि कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे की रणनीति बनाई जा सके।
शिक्षा विभाग का मानना है कि स्थानांतरण सत्र की बहाली से विद्यालयों में शिक्षण कार्य की गुणवत्ता और संसाधनों का संतुलन बेहतर किया जा सकेगा। विभाग द्वारा यह भी संकेत दिए गए हैं कि कोर्ट में सरकार की ओर से पक्ष रखे जाने और अनुमति मिलने के बाद ही तबादलों की प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जाएगा।
अब सभी की नजरें हाईकोर्ट की सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस साल राज्य में शिक्षकों के तबादले होंगे या नहीं।






