फोटो :सोसल मीडिया
अल्मोड़ा ज़िले के रानीखेत तहसील में 26 मई 2025 को जातिवाद की एक और शर्मनाक घटना सामने आई है। ग्राम रिची निवासी धारावल्लभ पुत्र स्व. मथो राम, जो कि अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, पर सवर्ण वर्ग के एक व्यक्ति द्वारा न केवल जातिसूचक गालियों से अपमानित किया गया बल्कि उनकी स्कूटी भी तोड़ दी गई। घटना उस समय की है जब पीड़ित गांव के ही चाय की दुकान पर बैठा था।
पीड़ित का आरोप है कि नंदन सिंह खाती नामक व्यक्ति ने उसे जातिगत आधार पर गालियां दीं, वीडियो बनाई और धमकी दी कि उसके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। पीड़ित ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत तहसीलदार बेतालघाट को दी है और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है।
इस मामले ने एक बार फिर उत्तराखंड में जातिगत हिंसा की गहराई को उजागर कर दिया है। यह वही उत्तराखंड है जहां 1980 में सल्ट के कफलटा गांव में दलित बारातियों को जिंदा जला दिया गया था।
क्या उत्तराखंड की सरकार ऐसे मामलों पर संज्ञान लेगी? या फिर यह “देवभूमि”, दलितों के लिए “दानवभूमि” बनी रहेगी?






