नैनीताल। डीएसबी परिसर नैनीताल का छात्रसंघ चुनाव इस बार सिर्फ प्रत्याशियों के बीच मुकाबले के कारण चर्चा में नहीं है। चुनावी माहौल में एक मां की भूमिका ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। हल्द्वानी की नगर पार्षद बीना चौहान अपने बेटे भानु प्रताप सिंह चौहान के अध्यक्ष पद के चुनाव अभियान में सक्रिय हैं। खास बात यह है कि बेटे के चुनाव प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए बीना ने खुद डीएसबी परिसर में एमए राजनीति विज्ञान में प्रवेश लिया है।
उम्र के छठे दशक में पहुंच चुकीं बीना इन दिनों एक ओर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, वहीं दूसरी ओर परिसर में छात्रा के रूप में नजर आ रही हैं। वह छात्र-छात्राओं से संवाद कर बेटे के लिए समर्थन जुटाने में लगी हैं।
पढ़ाई का जुनून, शादी के बाद दोबारा शुरू किया सफर
बीना चौहान की शिक्षा की कहानी भी दिलचस्प है। विवाह के बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और वर्ष 2014 में एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी से एजुकेशन विषय में एमए किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2025 में एलएलबी की पढ़ाई भी पूरी की। अब करीब 12 वर्ष बाद उन्होंने डीएसबी परिसर नैनीताल में राजनीति विज्ञान से एमए में प्रवेश लिया है।
बेटे के चुनाव में मां ने संभाली प्रचार की कमान
बीना का कहना है कि पढ़ाई के प्रति उनका लगाव अभी खत्म नहीं हुआ है। छात्रसंघ चुनाव के बाद भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए एमए पूरा करने का प्रयास करेंगी।
29 सितंबर को प्रस्तावित डीएसबी परिसर छात्रसंघ चुनाव में भानु प्रताप सिंह चौहान अध्यक्ष पद के प्रत्याशी हैं। भानु पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से टिकट के दावेदार बताए जा रहे थे, लेकिन मूल निवास से जुड़ी वजहों के चलते उन्हें संगठन का टिकट नहीं मिल सका। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय लिया।
खुद भी जनप्रतिनिधि हैं बीना
भानु के चुनाव अभियान में काला झंडा उनकी प्रमुख चुनावी पहचान के तौर पर सामने आया है। वहीं उनकी मां बीना चौहान लगातार उनके प्रचार अभियान में सक्रिय नजर आ रही हैं।
बीना चौहान हल्द्वानी-काठगोदाम नगर निगम क्षेत्र के नवाबी रोड से पार्षद हैं। जनप्रतिनिधि की भूमिका के साथ अब उनका छात्रा के रूप में कॉलेज परिसर में सक्रिय होना चुनाव के दौरान चर्चा का विषय बना हुआ है।
परिवार की बात करें तो बीना के बड़े बेटे राज चौहान हल्द्वानी में यू-ट्यूब से जुड़े हैं, जबकि उनके पति वाहन और ठेकेदारी के कारोबार से जुड़े बताए जाते हैं।
डीएसबी परिसर में छात्रसंघ चुनाव का परिणाम जो भी हो, इस बार चुनाव की चर्चाओं में एक मां का बेटे के लिए प्रचार करने के साथ खुद छात्रा बन जाना एक अलग कहानी जरूर जोड़ रहा है।
साभार :अमर उजाला





