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दमुवादूँगा में प्रशासन की दस्तक, लोगों को सता रहा बेघर होने का डर।

By damuwadhungalive

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हल्द्वानी। नैनीताल जिले का दमुवादूँगा क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार विकास या योजनाओं के चलते नहीं, बल्कि यहाँ रह रहे सैकड़ों परिवारों की दहशत के कारण। वर्ष 2016 में शासन द्वारा दमुवादूँगा बंदोबस्ती को राजस्व ग्राम घोषित किया गया था, मगर आज 9 साल बीतने के बाद भी यहाँ की खाली भूमि को ‘राजस्व भूमि’ मानते हुए स्थाई मालिकाना हक देने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

अब प्रशासन द्वारा एक नई समिति गठित की गई है, जो क्षेत्र में निवास कर रहे परिवारों और खाली भूमि की स्थिति का मूल्यांकन कर जमीन पर दावा तय करेगी। लेकिन इस प्रक्रिया से वहाँ के लोग और अधिक असमंजस और भय की स्थिति में हैं। उन्हें डर है कि कहीं यह प्रक्रिया उनके वर्षों पुराने घरों और जमीनों को उजाड़ने की ओर न बढ़ जाए।

क्या है मामला?

दमुवादूँगा क्षेत्र वर्षों से विस्थापित और कमजोर वर्गों का ठिकाना रहा है। 2016 में इसे राजस्व ग्राम घोषित कर कानूनी रूप से बसावट की प्रक्रिया प्रारंभ होनी थी, लेकिन भू-अभिलेख संक्षिप्तकरण और सीमांकन की प्रक्रिया अधूरी रही। नतीजतन, यहाँ की खाली भूमि ‘सरकारी जमीन’ मानी जा रही है। अब प्रशासन इसे लेकर पुनः सर्वे और स्थलीय सत्यापन की प्रक्रिया शुरू कर रहा है।

लोगों का दर्द:

स्थानीय निवासी बताते हैं कि उन्होंने यहाँ अपनी ज़िंदगी की सारी पूँजी लगाकर घर बनाए हैं, लेकिन आज उन्हें यह डर सताता है कि कहीं उन्हें ‘अवैध कब्जेदार’ न घोषित कर उजाड़ दिया जाए। वर्षों से यहाँ रह रहे लोग मालिकाना हक की माँग कर रहे हैं, मगर उनकी सुनवाई आज तक नहीं हुई है।

प्रशासन का पक्ष:

हाल ही में उपजिलाधिकारी हल्द्वानी राहुल शाह के हस्ताक्षर से जारी आदेश पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ग्राम दमुवादूँगा बंदोबस्ती अंतर्गत राजस्व भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। यह समिति 15 दिनों के भीतर सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी।

समिति में शामिल प्रमुख सदस्य:

श्री सी.सी. मिश्रा, नायब तहसीलदार हल्द्वानी

श्री अमित कुमार श्रीवास्तव, नायब तहसीलदार (सिविल) रामनगर

राजस्व उप निरीक्षक दमुवादूँगा

मोहित शर्मा एवं दीपक रावत, सर्वे लेखपाल

नगर निगम, नगर आयुक्त कार्यालय से प्रतिनिधि

अब क्या है चिंता का विषय?

स्थानीय निवासियों को डर है कि जमीन के स्थलीय सत्यापन के नाम पर उन्हें उनके घरों से बेदखल न कर दिया जाए। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और स्पष्ट नीति के अभाव ने लोगों को आशंका और दहशत में डाल दिया है।

स्थानीय संगठनों की माँग:

तत्काल मालिकाना हक प्रदान किया जाए

सभी निवासियों की भूमि और मकान को सुरक्षित घोषित किया जाए

सत्यापन में पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए


निष्कर्ष:


दमुवादूँगा क्षेत्र के निवासी आज विकास के बजाय अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के बिना इन लोगों को न्याय मिलना कठिन है। सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग अपने ही घरों में गैर-कानूनी ठहराए जाने के डर में जीते रहेंगे?

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