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नैनीताल न्यूज़: अब नौनिहाल पढ़ेंगे न्याय के देवता गोल्ज्यू और वीर जसवंत सिंह की गाथा

By damuwadhungalive

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नैनीताल, उत्तराखंड।
उत्तराखंड की लोक आस्थाओं और वीरता की गाथाओं को अब नई पीढ़ी भी किताबों के माध्यम से जान सकेगी। प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि स्कूली पाठ्यक्रम में न्याय के देवता गोल्ज्यू और 1962 के भारत-चीन युद्ध में अद्भुत साहस दिखाने वाले महावीर चक्र विजेता जसवंत सिंह रावत की वीरगाथा को शामिल किया जाएगा।

यह कदम राज्य के सांस्कृतिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने और बच्चों में देशभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, इन विषयों को कक्षा 6 से 8 तक की सामाजिक विज्ञान की किताबों में स्थान दिया जाएगा।

गोल्ज्यू देवता – न्याय और श्रद्धा के प्रतीक


कुमाऊं क्षेत्र में गोल्ज्यू देवता को ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजा जाता है। ऐसा विश्वास है कि उनके दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती। खासतौर पर चंपावत जिले के घोड़ाखाल मंदिर में भक्त अपनी फरियादें लिखकर पेश करते हैं। अब इस लोक आस्था को शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है।

जसवंत सिंह रावत – अकेले ही रोके थे चीन के कदम


अरुणाचल प्रदेश के तवांग क्षेत्र में 1962 में चीनी सेना के खिलाफ लोहा लेते हुए राइफलमैन जसवंत सिंह रावत ने अद्वितीय शौर्य का परिचय दिया था। पांच दिनों तक अकेले मोर्चा संभालते हुए उन्होंने दर्जनों चीनी सैनिकों को मार गिराया था। उनके इस वीरता को आज भी भारतीय सेना सम्मान देती है – उनकी पोस्ट पर आज भी उन्हें रोटी और पानी परोसा जाता है, मानो वे अभी भी ड्यूटी पर हैं।

संस्कृति और इतिहास से जुड़ाव


शिक्षाविदों का मानना है कि इस पहल से बच्चों में न केवल अपनी संस्कृति के प्रति गर्व की भावना बढ़ेगी, बल्कि उन्हें उत्तराखंड की समृद्ध परंपराओं और इतिहास की गहराई से पहचान भी मिलेगी।

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