हल्द्वानी ।
लोकतांत्रिक सामाजिक चेतना मंच ने उपनल कर्मचारियों को समान काम–समान वेतन दिए जाने के निर्णय का स्वागत किया है। साथ ही मंच ने उपनल के माध्यम से की गई नियुक्तियों में आरक्षण रोस्टर के पालन को लेकर गंभीर आशंका जताई है।
मंच का कहना है कि राज्य में 30 हज़ार से अधिक उपनल कर्मचारियों की नियुक्तियाँ की गई हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इनमें अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए निर्धारित आरक्षण कोटे का पालन हुआ है या नहीं। यदि आरक्षण रोस्टर को दरकिनार कर नियुक्तियाँ की गई हैं, तो यह संविधान और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
इस संबंध में मंच के अध्यक्ष जी.आर. टम्टा ने सरकार से स्पष्ट शब्दों में आवाहन किया है।
उन्होंने कहा—
“समान वेतन का निर्णय स्वागत योग्य है, लेकिन यदि उपनल भर्तियों में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं हुआ है, तो ऐसी भर्तियों को नियमित करना संविधान के साथ धोखा होगा। सरकार से हमारी मांग है कि बिना आरक्षण रोस्टर के की गई किसी भी भर्ती को नियमित न किया जाए।”
जी.आर. टम्टा ने आगे कहा कि
“आरक्षण कोई कृपा नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है। इसे कमजोर करने या नजरअंदाज करने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक सामाजिक चेतना मंच विरोध करेगा।”
मंच ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार शीघ्र ही इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट नहीं करती है, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। आंदोलन की रणनीति और कार्यक्रम की घोषणा जल्द की जाएगी।





