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: उत्तराखंड में गुटखा-पान मसाले पर एक साल की रोक, निर्माण और बिक्री पर सख्त

By damuwadhungalive

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देहरादून। उत्तराखंड में जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने तंबाकू और निकोटिन युक्त गुटखा, पान मसाला समेत संबंधित खाद्य उत्पादों पर सख्ती बढ़ा दी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।

सरकार के इस कदम का उद्देश्य तंबाकू और निकोटिन युक्त उत्पादों के सेवन से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को कम करना और आम लोगों, विशेषकर युवाओं को इनके दुष्प्रभावों से बचाना है।

निर्माण से बिक्री तक पर प्रतिबंध

प्रतिबंध के दायरे में आने वाले उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक लागू होगी। संबंधित कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा। खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी होगी कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजार में उपलब्ध न हों और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जनस्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है यह कदम?

गुटखा और तंबाकू युक्त पान मसाले का सेवन मुंह के कैंसर, मसूड़ों की बीमारियों और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। युवाओं में इन उत्पादों की बढ़ती खपत भी चिंता का विषय है। ऐसे में प्रतिबंध के साथ-साथ जनजागरूकता अभियान चलाना और नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन करना भी जरूरी होगा।

प्रतिबंध के पालन पर रहेगी नजर

सरकारी आदेश का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब बाजारों, दुकानों और वितरण नेटवर्क में इसकी नियमित निगरानी की जाएगी। प्रशासन के सामने चुनौती यह भी होगी कि प्रतिबंधित उत्पादों की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाया जाए।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड सरकार का यह फैसला जनस्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। अब यह देखना होगा कि प्रतिबंध को जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और इससे तंबाकू तथा निकोटिन युक्त उत्पादों की उपलब्धता पर कितना असर पड़ता है।

स्रोत:Amarujala

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