ताज़ा खबरें:
वन भूमि पर बसे गांवों को राजस्व गांव बनाने की मांग तेजहल्द्वानी में पुलवामा शहीदों को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि16-17 फरवरी को SC/ST कर्मचारियों को मिलेगा विशेष अवकाश, देहरादून में होगा प्रांतीय अधिवेशनउपनल व आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण को लेकर मंच का ज्ञापन, सीएम को सौंपा 5 सूत्रीय मांगपत्रलोकतांत्रिक सामाजिक चेतना मंच की बैठक में उपनल एवं आउटसोर्सिंग भर्तियों में आरक्षण उल्लंघन पर जताई नाराजगी

लखनऊ बस हादसा: बिहार से दिल्ली जा रही स्लीपर बस में लगी आग, दो बच्चों समेत 5 लोगों की मौत।

By damuwadhungalive

Published on:

आग बुझाने के बाद बस का दृश्य:फोटो सोशल मीडिया


मुख्य खबर: चलती स्लीपर बस में आग, 5 लोगों की मौत

लखनऊ, 15 मई 2025 – उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बुधवार तड़के एक चलती स्लीपर बस में भीषण आग लगने से दो बच्चों समेत पांच यात्रियों की मौत हो गई। यह बस बिहार से दिल्ली की ओर जा रही थी।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के वक्त अधिकांश यात्री सो रहे थे। तभी अचानक बस में आग लग गई। बस में सवार ड्राइवर और कंडक्टर ने कूदकर अपनी जान बचा ली, जबकि पीछे की सीटों पर बैठे यात्री आग की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि आग लगने के बाद भी बस करीब 1 किलोमीटर तक चलती रही, जिससे हालात और भयावह हो गए।

कुछ यात्रियों ने आगे के दरवाजे से भागकर और कुछ ने खिड़कियाँ तोड़कर अपनी जान बचाई। दुर्भाग्यवश, बस में लगा इमरजेंसी गेट इस दौरान नहीं खुला।


क्यों स्लीपर बसें बन रही हैं यात्रियों के लिए जानलेवा?

सुरक्षा मानकों की कमी: अधिकांश स्लीपर बसें फायर सेफ्टी उपकरणों के बिना चलती हैं।

निर्माण सामग्री में लापरवाही: सीटों, पर्दों और अन्य इंटीरियर में ज्वलनशील सामग्री का उपयोग आम है।

आपातकालीन निकास की समस्या: कई बसों में इमरजेंसी गेट या तो काम नहीं करते या अवरुद्ध रहते हैं।

तकनीकी जांच का अभाव: नियमित फिटनेस टेस्ट या मेंटेनेंस की प्रक्रिया निजी बस ऑपरेटरों में अक्सर नहीं होती।


भारत में स्लीपर बसों की स्थिति

देश में 22 लाख से अधिक रजिस्टर्ड बसें हैं।

इनमें लगभग 25,000 स्लीपर बसें हैं, जो मुख्य रूप से प्राइवेट ऑपरेटरों द्वारा चलाई जाती हैं।

सरकारी परिवहन की बसों की संख्या सिर्फ 1.4 लाख है।

18 लाख से ज्यादा प्राइवेट बसें हैं, और 2 लाख ई-बसे भी निजी क्षेत्र में चल रही हैं।


NCRB डेटा: बस सफर में हर साल हजारों की मौत

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार,

2018 से 2021 के बीच 22,442 लोगों की जान बस हादसों में गई।

इनमें 5,000 मौतें अकेले उत्तर प्रदेश में हुईं।

2015 से 2017 के बीच करीब 11,000 मौतें दर्ज की गईं।

औसतन हर साल 10,000 से ज्यादा लोग बस दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं।


निष्कर्ष:

हर बस हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। जब तक बसों में सुरक्षा मानकों को अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा, तब तक स्लीपर बसें यात्रियों के लिए चलते-फिरते ताबूत बनी रहेंगी। जरूरत है सख्त नियमों, निगरानी और जागरूकता की।

Leave a Comment