हल्द्वानी, 29 जून। उत्तराखंड में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज की सुरक्षा, न्याय एवं संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर लोकतांत्रिक सामाजिक चेतना मंच (DSAF) ने सोमवार को सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की मांग करते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने समयबद्ध कार्रवाई नहीं की तो प्रदेशभर में लोकतांत्रिक तरीके से जनजागरण अभियान और आंदोलन चलाया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने से पूर्व 28 जून को हल्द्वानी स्थित कौशल्या टॉवर, पंचक्की चौराहा में संगठन की बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समाज के विरुद्ध बढ़ रही जातिगत हिंसा, भेदभाव और उत्पीड़न की घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

बैठक में केतन लाल हत्याकांड का विशेष उल्लेख करते हुए मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर सभी दोषियों को शीघ्र एवं कठोर सजा दिलाने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं से प्रदेश के दलित समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बना है, जिसे समाप्त करने के लिए सरकार को प्रभावी कदम उठाने होंगे।
ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें केतन लाल हत्याकांड की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई, एससी-एसटी समाज पर हो रहे जातिगत उत्पीड़न की रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था, दमुवाँढूँगा, बिंदुखत्ता एवं हरिनगर के निवासियों को शीघ्र मालिकाना हक, एससीपी एवं टीएसपी बजट का शत-प्रतिशत उपयोग तथा निजी क्षेत्र, उपनल, आउटसोर्स और संविदा नियुक्तियों में आरक्षण रोस्टर का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना शामिल है।
बैठक की अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष जी. आर. टम्टा ने की, जबकि संचालन महामंत्री ई. पी. ह्यूमन ने किया। इस दौरान संगठन का विस्तार करते हुए हरीश कोहली को गंगोलीहाट तथा जगदीश प्रसाद को पाटी ब्लॉक का संयोजक मनोनीत किया गया।
ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष जी. आर. टम्टा, महामंत्री ई. पी. ह्यूमन, मुख्य सलाहकार डॉ. आर. के. बेरी, कोषाध्यक्ष प्रकाश बेरी, उपाध्यक्ष नंद किशोर टम्टा, संरक्षक रमेश चंद्र ह्यूमन, अधिवक्ता संजय बगड़वाल, अधिवक्ता राजेंद्र सिंह कुटियाल, हरीश कोहली, जगदीश प्रसाद सहित अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
संगठन ने प्रदेश सरकार से अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शीघ्र ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।





